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कार्टन ओर कीटनाशक दवाईयों का दामो में वृद्धि ,राजभवन पहुची कांग्रेस ,दाम कम करने की राज्यपाल से उठाई मांग

 

कार्टन ओर कीटनाशक दवाईयों का दामो में वृद्धि ,राजभवन पहुची कांग्रेस ,दाम कम करने की राज्यपाल से उठाई मांग

एंकर । हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन शुरू हो गया है लेकिन कीटनाशक दवाइयों के साथ  कार्टन के दामों में हुई वृद्धि ने बागबानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। सोमवार को जुब्बल कोटखाई के विधायक रोहित ठाकुर बागवानों के साथ राजभवन पहुचे जहा राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर को ज्ञापन सौंप कर कीटनाशक दवाइयों पैकिंग सामग्री पर बढ़ाए दामो को वापिस लेने और सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने के साथ ही सेब के समर्थन मूल्य को बढ़ाने व मंडी मध्यस्थता योजना (MIS) के तहत बक़ाया राशि को ज़ारी करवाने का अग्राह किया।

जुब्बल कोटखाई के विधायक रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में कृषि व बाग़वानी का GDP में 13 प्रतिशत का योगदान है।  हिमाचल प्रदेश में बाग़वानी क्षेत्र में सेब ₹5000 करोड़ रुपए की आर्थिकी पैदा करता हैं। वर्तमान में केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों से बाग़वानी उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहें हैं।पिछ्ले  दो वर्षो से लगातार पैकिंग सामग्री में  40 से 50%  प्रतिशत की वृद्धि हो गई हैं। पिछले वर्ष के मुकाबलें इस बार कार्टन में 5 से 10 रुपए जबकि प्रति बंडल ट्रे में ₹200 रूपए की अप्रत्याशित वृद्धि हुई हैं।  निजी कंपनियां पैंकिग सामग्री के दाम बढ़ने का कारण केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी दर में 12% से 18% वृद्धि को बताकर पल्ला झाड़ रही हैं। ,  पैकिंग सामग्रियों के दाम बढ़ने से बाग़वानी की लागत बढ़ती ही जा रही हैं जिसने बाग़वानों की कमर तोड़ कर रख दी हैं।  उन्होंने राज्यपाल से  आग्रह हैं कि पैकिंग सामग्रियों पर 18%  जीएसटी दर को घटाया जाए व पैकिंग सामग्री का विपणन नियंत्रित दरों पर हिम्फेड़ व एचपीएमसी के माध्यम से करवाया जाए।

इसके अलावा  कृषि-बाग़वानी क्षेत्र में उपयोग होने वाली कीटनाशक-फफूंदनाशक दवाइयों के दामों में निजी कंपनियों द्वारा लगातार वृद्धि की जा रहीं हैं। कुछ आवश्यक कीटनाशक- फफूंदनाशक दवाइयों के दाम तो दोगुने हो गए हैं।  इन दवाइयों के दामों को नियंत्रित किया जाएं, जीएसटी की दर को घटाया जाएं ।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 व 2019 के संसदीय चुनाव में सेब को विशेष उत्पाद श्रेणी का दर्ज़ा दिलाने व सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा की थी जिस पर सरकार ने कोई पहल नही की हैं। आयात शुल्क 50% होने के चलते विदेशों से सस्ते दामों में सेब आयात हो रहा हैं जिससे प्रदेश के बागवानों को भारी आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ रहा हैं।

इसके अलावा  वर्ष 2021 में सेब बाहुलीय क्षेत्रों में बेमौसमी बर्फबारी और ओलावृष्टि से बाग़वानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। प्रदेश सरकार के अनुमान के अनुसार ₹ 284 करोड का नुकसान का आंकलन किया था और अब एक वर्ष बीत जाने के बाद सरकार से बागवानों को कोई राहत नही मिली हैं।