डॉ राहुल गुप्ता गरीब मरीजों के मसिहा बनने के साथ अब पोस्टमाटर्म के भी बने मसिहा

 

डॉ राहुल गुप्ता गरीब मरीजों के मसिहा बनने के साथ अब पोस्टमाटर्म के भी बने मसिहा

आई.जी.एम.सी. फॉरेसि मैडिसन के एसोसिएट प्रोफेसर डा. राहुल गुप्ता द्वारा पोस्टमार्ट पर किया गया शोध पूरी दुनिया में पब्लिश हुआ है। प्रशासनिक अधिकारी के तौर सेवाएं देते समय जहां राहुल गुप्ता गरीब मरीजों के मसिहा बने है वहीं अब पोस्टमाटर्म के भी मसिहा बन चुके है। शनिवार को शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान गुप्ता ने कहा कि उन्होंने कई बढ़े मामलों में पोस्टमार्टम किए हंै और कई किताबों में नाम दर्ज हुआ है, लेकिन उनके मन में कुछ ऐसी सोच पैदा हो गई कि जब किसी मरीज का पोस्टमार्टम होता है तो परिजनों को शव घर ले जाना मुश्किल हो जाता था, लेकिन अब इससे काफी सरल बनाया गया है। ताकि परिजनों को किसी भी प्रकार की दिक्क तें ना आए। शव से पोस्टमार्ट के बाद काफी खून बहता था और शमशानघाट तक दाह संस्कार के लिए शव ले जाना मुश्किल हो जाता था। अब शव को प्रोपर तरीके से भेजा जाता है। पोस्टमार्टम के लिए पहले 4 प्रकार से तो अब 5 प्रकार से चिरा लगाया जाता है। गुप्ता ने कहा कि इन दिनों दो कारणों से पोस्टमार्टम हो रहा है। इनमें एक पुलिस के द्वारा कोर्ट में बताने के लिए की मौत किन कारणों से हुई है और दूसरा बीमारी का पता लगाने के लिए किया जाता है। पोस्टमार्टम इसलिए करवाना जरूरी है कि बीमारी का पता चल सके। कई बार ऐसा देखा गया है कि अगर परिवार में 5 सदस्य है तो कुछ बीमारी ऐसी है जो एक से दूसरे में फैलती है। अगर बीमारी का पता चल सके तो फिर उसका उपचार करवाया जा सकता है। पोस्टमार्टम को लेकर भ्रांतिया नहीं फैलानी चाहिए।

गुप्ता ने कहा कि आई.जी.एम.सी. में कई गरीब लोग आते हैं। ऐसे में उनकी सेवा करना धर्म है। राहुल वे भले ही प्रशासन अधिकारी नहीं होगे, लेकिन गरीबों की सेवा करने से पीछे नहीं हटेंगे। जब प्रशासनिक अधिकारी थे तो ीाी गरीब मरीजों की हर प्रकार की सेवा की है। जब पत्रकारों द्वारा एम.एस. के पद को लेकर पूछा गया कि अब एम.एस. कौन होगा। गुप्ता ने इस पर जबाव दिया कि इस बारे में उन्हें कोई पता नहीं है।