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राज्यपाल ने ए.पी.जी. विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता की

राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि जीवन के उद्देश्यों को प्राप्त करने में आत्म-विश्वास महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है और विकास की राह में आगे बढ़ने में मददगार सिद्ध होता है।

राज्यपाल ने आज यह बात ए.पी.जी. विश्वविद्यालय, शिमला के दीक्षांत समारोह के अवसर पर कही।

उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा तथा शोध के क्षेत्र में उच्च स्तर स्थापित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का मुख्य ध्येय उत्कृष्ट शिक्षा अनुसंधान के माध्यम से समाज में बेहतर योगदान करना हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इस दिशा में खरा उतर रहा है। उन्होंने गुणात्मक शिक्षा पर बल दिया और शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक एवं कल्याणकारी गतिविधियां भी आरम्भ करने को कहा।

राज्यपाल ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह उनके शैक्षणिक जीवन में एक मील पत्थर है। उन्होंने कहा कि कठोर परिश्रम और समर्पण से अर्जित यह डिग्री प्राप्त करने का अवसर आपके लिए और आपके अध्यापक व अभिभावकों के लिए भी गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों से आरम्भ हुई उच्च शिक्षा की यह यात्रा न केवल उनकी व्यवसायिक जीवन बल्कि उनके भविष्य में भी सहायक सिद्ध होगी। सीखना जीवन की एक निरंतर प्रक्रिया है और शिक्षा संस्थानों द्वारा स्थापित नींव हर क्षेत्र में विद्यार्थियों को सशक्त करती है।

राज्यपाल ने डिग्री धारक विद्यार्थियों को बिना किसी लालच के समाज और देश की सेवा स्नेह व समर्पण भाव से करने और आम जनता की आशाओं पर खरा उतरने का आग्रह किया। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसे लक्ष्य रखने को कहा जिन्हें भविष्य में प्राप्त किया जा सके। उन्होंने शिक्षा और ज्ञान को सीमित न रख कर उसका उपयोग समाज के उत्थान के लिए करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में हर क्षण तकनीक में परिर्वतन आ रहा है और नई अवधारणाएं स्थापित हो रही हंै। उन्होंने कहा कि स्थापित परिप्रेक्ष्य संशोधित हो रहे है और शोध के नए आयाम स्थापित हो रहे हंै। शोध के क्षेत्र में कई परिवर्तन आ रहे है जो अपने आप में प्रशसंनीय और अभूतपूर्व हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में ज्ञान विश्व में उभरती सम्पदा है और युवा राष्ट्र की शक्ति हैं। उन्होंने युवाओं को नए विचारों के साथ आगे बढ़कर नए भारत के निर्माण में योगदान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक की सदी है और तकनीक में सशक्त व्यक्ति ही विश्व की प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीक के ज्ञान के साथ-साथ चरित्र-निर्माण भी महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज लड़कियां विकास के हर क्षेत्र में अग्रणीय हैं और आशा जताते हुए कहा कि इस संस्थान की लड़कियां भी अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देंगी। उन्होंने विद्यार्थियों को रोजगार के पीछे भागने के बजाय उद्यमी बनने को कहा ताकि अन्य लोगों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकंे।

इसके उपरांत, इस अवसर पर राज्यपाल ने मेधावी छात्रों को डिग्री व मेडल भी प्रदान किए।

इससे पूर्व, एपीजी विश्वविद्यालय, शिमला के कुलाधिपति डाॅ. रजत माथुर ने इस अवसर पर राज्यपाल का स्वागत किया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश कुमार चैधरी ने संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर टोगो दूतावास के मिशन चार्ज अफेयर के प्रमुख कोंडी मनी, टोगो दूतावास के द्वितीय काउंसलर यावो ए. अक्पेमाडो, विश्वविद्यालय के अध्यापकगण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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