राज्यपाल ने किसानों से प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया

राज्यपाल ने किसानों से प्राकृतिक  खेती, खुशहाल किसान योजना का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान किया
राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने किसानों से प्रदेश सरकार की प्राकृतिक ‘खेती, खुशहाल किसान’ योजना का लाभ उठाकर हिमाचल प्रदेश को प्राकृतिक खेती करने वाला राज्य बनाने का आह्वान किया है।
राज्यपाल आज शिमला के निकट राज्य कृषि प्रबन्धन और विस्तार प्रशिक्षण संस्थान मशोबरा में ‘प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान’ योजना पर उत्तम किसान सम्मेलन और कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे। इस कार्यशाला में सात ज़िलों के 32 विकास खण्डों के लगभग 250 किसानों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि कृषि और सम्बद्ध क्षेत्र की हिमाचल की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका है जो प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद में 10 प्रतिशत का योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 5.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र मंे कृषि की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आरम्भ की गई प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना बेहतर परिणाम दे रही है। इस योजना के अंतर्गत इस वित्त वर्ष में 50 हजार किसानों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 42 हजार किसान प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में किसान इस योजना को अपना रहे हैं।
श्री दत्तात्रेय ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 के लिए 19.03 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस अवधि के दौरान 1600 प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 1200 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करवाए जा चुके हैं। इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अब 2669 किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है। योजना के अंतर्गत 1155 हेक्टेयर क्षेत्र और 2541 पंचायतों को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत लाया गया है।
उन्होंने कहा कि भारत गांवों में बसता है और गावों का अर्थ किसान हैं। प्राकृतिक खेती किसानों की आय दोगुना करने तथा किसानों को सशक्त बनाने में कारगर सिद्ध हुई है। उन्होंने इस दिशा में किसानों को जागरूकता करने के लिए और अधिक किसान सम्मेलनों को आयोजित करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने किसानों के साथ प्राकृतिक खेती के बारे में विचार-विमर्श किया।
कृषि मंत्री डाॅ. राम लाल मारकण्डा ने कहा कि प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान योजना के अंतर्गत सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती योजना को प्रदेश में दो वर्ष पूर्व आरम्भ किया गया था और आज इसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने इस परियोजना को लागू करने में रूचि दिखाई तथा उनके दिशा-निर्देशों से इस योजना को प्रदेश में विस्तृत तथा व्यावहारिक रूप से क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाला हिमाचल देश का पहला राज्य बन जाएगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वर्ष, 2022 तक हिमाचल पूरी तरह से प्राकृतिक कृषक राज्य बन जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय नस्ल की गाय प्राकृतिक खेती का एक मुख्य घटक है इसलिए किसानों को गाय की खरीद के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक उत्पादों के विपणन के लिए विभिन्न स्थानों पर बिक्री केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं।
सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती के राज्य परियोजना निदेशक राकेश कंवर ने कहा कि पिछले 20 वर्षों से रासायनिक खेती की जा रही है और सभी स्तरों पर इसे प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों ने अपने स्तर पर भी प्राकृतिक खेती को अपनाया है और प्रदेश सरकार के प्रयासों को बल दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री प्रदेश में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती से जुड़ी हुई गतिविधियों की स्वयं निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा न केवल भारत बल्कि अन्य देशों जैसे फ्रांस, नार्वे, फिनलैंड आदि में भी रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम किया जा रहा है और यूरोपियन यूनियन ने भी रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को कम करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
सहायक निदेशक डाॅ. राजेश्वर चन्देल ने प्राकृतिक खेती से जुड़े विभिन्न विषयों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश में सुभाष पालेकर प्राकृतिक खेती की दिशा में हुई प्रगति के बारे में प्रस्तुति दी।
कृषि निदेशक आर.के. कौंडल ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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