राष्ट्र के लिए एक सहयोगी विकास दृष्टि विकसित करने के प्रयास-निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों और वित्त मंत्रियों के साथ एक वर्चुअल बैठक की, जिसमें सुधार-केंद्रित व्यावसायिक माहौल बनाने के तरीकों और विकास को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए निवेश की सुविधा प्रदान करने पर चर्चा की गई। वर्चुअल बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चैधरी और भागवत कराड के अतिरिक्त भारत सरकार के मंत्रालयों के सचिव तथा राज्यों के मुख्य सचिव और वित्त सचिव शामिल थे।
केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्र के लिए एक सहयोगी विकास दृष्टि विकसित करने और देश के निवेश माहौल को बढ़ाने पर केंद्रित विचारों के खुले आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस बातचीत से निवेश आधारित विकास के लिए एक सुविधाजनक वातावरण बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह निवेश प्रोत्साहन और ईज आॅफ डूइंग बिजनेस सुधारों द्वारा लाए गए दक्षता के लिए एक सक्रिय दृष्टिकोण से संभव होगा।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि महामारी के दौरान आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के बाद अर्थव्यवस्था में फिर से तेजी आई है और इसमें सुधार के संकेत अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आईएमएफ और विश्व बैंक ने भारत की जीडीपी वृद्धि क्रमशः 9.5 प्रतिशत और 8.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
शिमला से वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग लेते हुए, मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने देश में मुफ्त टीके उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि राज्य को अपनी 55 लाख से अधिक योग्य आबादी का टीकाकरण करने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को विकास में भागीदार बनाने के लिए राज्य सरकार ने नवंबर, 2019 में ग्लोबल इन्वेस्टर मीट का आयोजन किया, जिसमें 96,720 करोड़ रुपये के 703 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। उन्होंने कहा कि बैठक के दो महीने के भीतर ही 13,488 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के सम्बन्ध में 236 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने ईज आॅफ डूइंग बिजनेस में बेहतरीन कार्य किया है, जिससे राज्य की रैंकिंग सुधार हुआ है और यह 17वें से 7वें स्थान पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। कोविड पूर्व के दौर में राज्य की अर्थव्यवस्था में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो कि कोविड-19 के दौरान घटकर माइनस 6.2 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, अब यह वृद्धि 5.5 फीसदी हो गई है।
जय राम ठाकुर ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 2095 करोड़ रुपये की एशियन विकास बैंक (एडीबी) पर्यटन अवसंरचना विकास परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से आर्थिक मामलों के विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी से इस परियोजना को मंजूरी दिलवाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में पर्यटन गतिविधियों को काफी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से प्रदेश में हवाई सम्पर्क को मजबूत करने के लिए राज्य को हर संभव सहायता प्रदान करने का भी आग्रह किया। उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री से आगामी वर्ष के केंद्रीय बजट में मंडी में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये का प्रावधान करने का अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाने का भी आग्रह केंद्रीय मंत्री से किया। उन्होंने कहा कि भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन की लागत केंद्र और राज्य सरकारें 75ः25 के अनुपात में वहन कर रही हैं। उन्होंने भानुपल्ली-बिलासपुर-लेह रेलवे लाइन के सामरिक महत्व को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री से आग्रह किया कि इस प्रस्तावित रेलवे लाइन का पूरा खर्च केंद्र वहन करे।
जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश अब तक लगभग 10,948 मेगावाट बिजली क्षमता का दोहन करने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि करीब 5497 मेगावाट की परियोजनाएं क्रियान्वयन के लिए निजी क्षेत्र को आवंटित की गई हैं। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए वन टाइम एमनेस्टी योजना राज्य में बिजली क्षेत्र के लिए वरदान साबित हुई है।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग आर.डी. धीमान, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना, अतिरिक्त मुख्य सचिव आबकारी एवं कराधान जे.सी. शर्मा, सचिव जल शक्ति विकास लाबरू, सचिव स्वास्थ्य एवं बागवानी अमिताभ अवस्थी, योजना सलाहकार डाॅ. बासु सूद और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।