समरसता भारत की संस्कृति की ताकत है – समरसता होती तो कोई बाहरी ताकतें देश को आघात नहीं पहुंचा पाती- राज्यपाल

समरसता भारत की संस्कृति की ताकत है – समरसता होती तो कोई बाहरी ताकतें देश को आघात नहीं पहुंचा पाती- राज्यपाल

सामाजिक समरसता दिवस पर आज शिमला में सुनील उपाध्याय एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर भाग लिया.

राज्यपाल ने कहा कि समरसता भारत की संस्कृति की ताकत है और इसे समाज में पुर्नस्थापित करने की जिम्मेदारी हर व्यक्ति की। उन्होंने कहा कि समाज में समरसता की अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में समरसता जब-जब कम हुई तब-तब हम समस्याग्रस्त हुए। राज्यपाल ने कहा कि जब जब देश में समरसता की कमी रही है तो बाहरी ताकतों ने नुकसान पहुंचाया है उन्होंने कहा कि देश को एकजुट करने की आवश्यकता है ताकि लोगों में समरसता बनी रहे ऐसा तभी संभव है जब इस विषय को लेकर समय-समय पर चर्चा हो और इससे बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएं आज के युवा और छात्रों के लिए इस विषय को अलग से पढ़ाई जाने की जरूरत है.